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ग्वार पाठा (घृत कुमारी) Aloe Vera

यह एक अत्यन्त उपयोगी बहुवर्षीय मासल पत्रों वाला एक से दो फुट ऊँचा पौधा है जो अपनी जड के पास स्वत: उगे हुए छोटे पौधों को अलग करके बोने से प्रसारित किया जा सकता है। यह मरूस्थली बंजर भूमि में ज्यादा सरलता से लगता है व अति ऊष्ण एवं शुष्क जलवायू को सह सकने की क्षमता रखता है।

गुण धर्म :

  1. इसके गूदे से यकृत (लिवर) की क्रिया में आशातीत लाभ होता है और खाये अन्न का साम्यीकरण होता है।
  2. यह विरेचन करता है क्योंकि इसका सीधा प्रभाव बड़ी आंत पर होता है अत: कब्ज आदि में इसका प्रयोग लाभप्रद होता है।
  3. इसके रस का स्तन शौध, चर्म विकार, अर्श (मस्से) एवं घाव में हल्दी के साथ बाहरी लेप करने पर आराम मिलता है।
  4. यह बलवर्धक भी है और वायू विकारों में लाभ होता है। इसके लड्डू बनाकर खाने से वाय के रोगों में बहुत लाभ मिलता है।
  5. उधोगों में आजकल इसको सौन्दर्य प्रसाधन क्रीमों में बहुलता से उपयोग किया जाने लगा है।

घरेलु उपयोग विधि :

एक स्वस्थ पत्ती (2-3 इंच चौड़ी) का 3-4 इंच का टुकड़ा काटकर कांटेदार किनारे काट दें। बीच के गूदे के ऊपर व नीचे छिलके को उतार कर चेहरे व हाथ-पाव पर मलने के काम लें। लिसलिसाये गूदे को सीधा खा लें अथवा मिक्सी मशीन में चलाकर पीस लें। यह सब प्रकार के रोगों के निवारण में सहायक होगा।

खुरासनी अजवायन – Khurasani Ajwain (Hyoscyamus Niger)

यह पौधा सीधा, रोमश, चिपचिपा व तेज गंध वाला होता है जो बीज अथवा कटिंग से लगाया जाता है। जब पौधो में फूल निकलने लगते हैं तो फूल व पत्तियाँ तोड़कर 3-4 दिन सुखा कर इक्कठा कर लेते है। इसके बीजों में हायोसायमीन नामक नशीला उपक्षार व तेल पाया जाता है।

अनुभूत प्रयोग :

  1. गठिया, संधिवात (जोड़ों की सूजन), रक्तीपत्र आदि रोगों में इसका लेप करने से लाभ होता है।
  2. खुरासनी अजवायन को राल के साथ पीसकर दांतों के खड्डों में लगाने से दाँतों के कीड़ों का नाश होता है।
  3. प्रात:काल के समय थोड़ा गुड़ मिलाकर पानी के साथ इसकी फक्की देने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं।
  4. ज्वर में पाचन सुधारकर भूख बढ़ती है। मूत्र साफ होता है और दाह शान्त होता है। इसमें गुड़ के साथ प्रयोग करना चाहिये।
  5. पित्तजनक वमन (उल्टी) होने पर नींबू के रस के साथ देने से लाभ होता है।
  6. यह सुन्दरता का पौधा भी है।